Khilji Vansh in Hindi

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Khilji Vansh in Hindi
Khilji Vansh in Hindi

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Khilji Vansh in Hindi

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No.-1. खिलजी वंश मध्यकालीन भारत का एक राजवंश था।

No.-2. दिल्ली की मुस्लिम सल्तनत में दूसरा शासक परिवार था, हालांकि खिलजी कबीला लंबे समय से अफगानिस्तान में बसा हुआ था, लेकिन अपने पूर्ववर्ती गुलाम वंश की तरह यह राजवंश भी मूलत: तुर्किस्तान का था।

No.-3. खिलजी वंश की स्थापना जलालुद्दीन ख़िलजी ने की थी, जिसने अपना जीवन एक सैनिक के रूप में प्रारम्भ किया था।

No.-4. खिलजी महमूद गजनवी एवं मुहम्मद गोरी के समय भारत आए तथा दिल्ली के सुल्तानों के समय सेना एवं अन्य प्रशासनिक पदों पर नौकरी करने लगे तथा सल्तनत काल की अव्यवस्था का फायदा उठाकर सल्तनत के स्वामी बन बैठे।

No.-5. जलालुद्दीन ख़िलजी अथवा ‘जलालुद्दीन फ़िरोज ख़िलजी’ (1290-1296 ई.) ‘ख़िलजी वंश‘ का संस्थापक था।

No.-6. जलालुद्दीन फिरोजशाह खलजी बलबन का सर-ए-बहौदार(शाही अंगरक्षक) तथा कैकुबाद के शासन काल में आरिज-ए-मुमालिक(सेना मंत्री) तथा सेनापति के पद पर पहुंच गया था।

No.-7. कैकुबाद ने जलालुद्दीन को शाइस्ता खाँ की उपाधि दी लेकिन जलालुद्दीन फिरोज खिलजी ने 1290 में कैमूर्स/क्यूमर्स को सुल्तान घोषित किया । किन्तु कुछ माह बाद कैमूर्स की हत्या कर जलालुद्दीन ने खिलजी वंश की स्थापना की।

No.-8. इसने 70 वर्ष की आयु में कैकुबाद द्वारा निर्मित किलोखरी महल ( दिल्ली ) में राज्याभिषेक कराया तथा किलोखरी को ही राजधानी बनाया।

No.-9. सुल्तान बनते समय जलालुद्दीन की उम्र 70 वर्ष की थी। दिल्ली का वह पहला सुल्तान था, जिसकी आन्तरिक नीति दूसरों को प्रसन्न करने के सिद्धान्त पर थी।

No.-10. जलालुद्दीन की हत्या 1296 ई. में उसके भतीजा एवं उसके दामाद  अलाउद्दीन खिलजी  ने कड़ामानिकपुर में कर दी ।

History of Khilji Vansh in Hindi

अलाउद्दीन खिलजी ( 1296-1316 ई. )

No.-1. अलाउद्दीन खिलजी ( 1296-1316 ई. )का वास्तविक नाम अली गुर्शास्प था।यह 22 अक्टूबर 1296 को दिल्ली का सुल्तान बना। यह दिल्ली सल्तनत के खिलजी वंश का दूसरा शासक था।

No.-2. अलाउद्दीन खिलजी ने सेना को नगद बेतन देने एवं स्थाई सेना कि नींव रखी । दिल्ली के शासकों में अलाउद्दीन खिलजी के पास सबसे विशाल स्थायी सेना थी।

No.-3. इसने सिकंदर-ए-सानी की उपाधि धारण की । इसने यामिनि-उल-खलीफा तथा नासिरी -अमीर -उल -मोमनीत जैसी उपाधियां भी धारण की थी।

No.-4. इसने भूराजस्व की दर को बढाकर उपज का 1/2 भाग कर दिया।

No.-5. इसने इक्ता, इनाम, मिल्क तथा वक्फ भूमि को खालसा ( राजकीय ) भूमि में परिवर्तित कर दिया।

No.-6. गैर – मुस्लिम लोगों से जजिया कर और मुस्लिमों से जकात कर वसूला जाता था।

No.-7. अलाउद्दीन खिलजी के दरबार में प्रमुख विद्वान अमीर खिसरो और हसन देहलवी निवास करते थे।

No.-8. दक्षिण भारत की विजय के लिए अलाउद्दीन खिलजी ने मालिक काफुर को भेजा।

No.-9. जमेयत खाना मस्जिद, अलाई दरवाजा, सीरी का किला तथा हजार खंभा महल का निर्माण अलाउद्दीन खिलजी ने करवाया था ।

No.-10. अलाउद्दीन खिलजी की नीतियों में सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण नीति उसकी बाजार नियंत्रण की नीति थी।

No.-11. अलाउद्दीन खिलजी के द्वारा दो कर लगाए गए थे ।

चराई कर – दुधारू पशओं पर लगाया जाता था।

गाढ़ी कर – घरों एवं झोपड़ी पर लगाया जाता था ।

No.-12. अलाउद्दीन खिलजी के शासन काल में 1297 से 1306 ई तक मंगोलों के 6 आक्रमण हुए थे ।

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No.-13. अलाउद्दीन खिलजी की 5 जनवरी 1316 ई. को इसकी मृत्यु हो गई।

No.-14. शिहाबुद्दीन उमर ख़िलजी अलाउद्दीन ख़िलजी का पुत्र था।

No.-15. मलिक काफ़ूर के कहने पर अलाउद्दीन ने अपने पुत्र ‘ख़िज़्र ख़ाँ‘ को उत्तराधिकारी न बना कर अपने 5-6 वर्षीय पुत्र शिहाबुद्दीन उमर को उत्तराधिकारी नियुक्त कर दिया।

No.-16. अलाउद्दीन की मृत्यु के बाद काफ़ूर ने शिहाबद्दीन को सुल्तान बना कर सारा अधिकार अपने हाथों में सुरक्षित कर लिया।

No.-17. लगभग 35 दिन के सत्ता उपभोग के बाद काफ़ूर की हत्या अलाउद्दीन के तीसरे पुत्र मुबारक ख़िलजी ने करवा दी।

No.-18. काफ़ूर की हत्या के बाद वह स्वयं सुल्तान का संरक्षक बन गया और कालान्तर में उसने शिहाबुद्दीन को अंधा करवा कर क़ैद करवा दिया।

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