JIYA RANI “MAULA DEVI” / जिया रानी – मौला देवी

जिया रानी (अंग्रेजी : Jiya Rani) उत्तराखंड राज्य की प्रख्यात रानियों में से एक हैं। जिया रानी को मौला देवी के नाम से भी जाना जाता है। जिया रानी (मौला देवी) का बचपन का नाम मौला देवी था। वो हरिद्वार (मायापुर) के राजा अमरदेव पुंडीर की पुत्री थी। सन 1192 में देश में तुर्कों का शासन स्थापित हो गया था, मगर उसके बाद भी किसी तरह दो शताब्दी तक हरिद्वार में पुंडीर राज्य बना रहा, मगर तुर्कों के हमले लगातार जारी रहे और न सिर्फ हरिद्वार बल्कि गढ़वाल और कुमायूं में भी तुर्कों के हमले होने लगे। Today we share about  कर्णावती का वर्तमान नाम बताएं, उत्तराखंड भाषा संस्थान देहरादून, गढ़वाल का रेनी गांव किसके लिए प्रसिद्ध है, उत्तराखंड भाषा संस्थान कहाँ है, गढ़वाल की रानी, वासुकी ताल किस जिले में है, नाक कटी रानी|

JIYA RANI “MAULA DEVI”

No.-1. ऐसे ही एक हमले में कुमायूं (पिथौरागढ़) के कत्युरी राजा प्रीतम देव ने हरिद्वार के राजा अमरदेव पुंडीर की सहायता के लिए अपने भतीजे ब्रह्मदेव को सेना के साथ सहायता के लिए भेजा।

No.-1. Download 15000 One Liner Question Answers PDF

No.-2. Free Download 25000 MCQ Question Answers PDF

No.-3. Complete Static GK with Video MCQ Quiz PDF Download

No.-4. Download 1800+ Exam Wise Mock Test PDF

No.-5. Exam Wise Complete PDF Notes According Syllabus

No.-6. Last One Year Current Affairs PDF Download

No.-7. Join Our Whatsapp Group

No.-8. Join Our Telegram Group

No.-2. जिसके बाद राजा अमरदेव पुंडीर ने अपनी पुत्री मौला देवी का विवाह कुमायूं के कत्युरी राजवंश के राजा प्रीतमदेव उर्फ़ पृथ्वीपाल से कर दिया। मौला देवी प्रीतमपाल की दूसरी रानी थी। मौला रानी से तीन पुत्र धामदेव, दुला, ब्रह्मदेव हुए जिनमे ब्रह्मदेव को कुछ लोग प्रीतम देव की पहली पत्नी से मानते हैं। मौला देवी को राजमाता का दर्जा मिला और उस क्षेत्र में माता को जिया कहा जाता था।

No.-3. इसलिए उनका नाम जिया रानी पड़ गया, कुछ समय बाद जिया रानी की प्रीतम देव से अनबन हो गयी और वो अपने पुत्र के साथ गोलाघाट चली गयी जहां उन्होंने एक खूबसूरत रानी बाग़ बनवाया,यहाँ जिया रानी 12 साल तक रही ।

No.-4. 1398 में मध्य एशिया के हमलावर तैमुर ने भारत पर हमला किया और दिल्ली मेरठ को रौंदता हुआ वो हरिद्वार पहुंचा जहाँ उस समय वत्सराजदेव पुंडीर शासन कर रहे थे, उन्होंने वीरता से तैमुर का सामना किया, मगर शत्रु सेना की विशाल संख्या के आगे उन्हें हार का सामना करना पड़ा, पुरे हरिद्वार में भयानक नरसंहार, जबरन धर्मपरिवर्तन हुआ और राजपरिवार को भी उतराखण्ड के नकौट क्षेत्र में शरण लेनी पड़ी वहां उनके वंशज आज भी रहते हैं और मखलोगा पुंडीर के नाम से जाने जाते हैं।

No.-5. तैमूर ने एक टुकड़ी आगे पहाड़ी राज्यों पर भी हमला करने भेजी, जब ये सूचना जिया रानी को मिली तो उन्होंने इसका सामना करने के लिए कुमायूं के राजपूतो की एक सेना का गठन किया, तैमूर की सेना और जिया रानी के बीच रानीबाग़ क्षेत्र में युद्ध हुआ जिसमे मुस्लिम सेना की हार हुई। इस विजय के बाद जिया रानी के सैनिक कुछ निश्चिन्त हो गये, पर वहां दूसरी अतिरिक्त मुस्लिम सेना आ पहुंची जिससे जिया रानी की सेना की हार हुई, और सतीत्व की रक्षा के लिए एक गुफा में जाकर छिप गयी।

No.-6. जब प्रीतम देव को इस हमले की सूचना मिली तो वो स्वयं सेना लेकर आये और मुस्लिम हमलावरों को मार भगाया, इसके बाद में वो जिया रानी को पिथौरागढ़ ले आये, प्रीतमदेव की मृत्यु के बाद मौला देवी ने बेटे धामदेव के संरक्षक के रूप में शासन भी किया था। लेकिन जिया रानी स्वयं शासन के निर्णय लेती थी। माना जाता है कि राजमाता होने के चलते उसे जियारानी भी कहा जाता है।

JIYA RANI TEMPLE – RANIBAGH (KATHGODAM, NAINITAL)

No.-1. वर्तमान में रानीबाग में जियारानी की गुफा नाम से प्रचलित है। कत्यूरी वंशज प्रतिवर्ष उनकी स्मृति में यहां पहुंचते हैं। यहाँ जिया रानी की गुफा के बारे में एक और किवदंती प्रचलित है। “कहते हैं कत्यूरी राजा पृथवीपाल उर्फ़ प्रीतम देव की पत्नी रानी जिया यहाँ चित्रेश्वर महादेव के दर्शन करने आई थी। वह बहुत सुन्दर थी।

No.-2. जैसे ही रानी नहाने के लिए गौला नदी में पहुँची, वैसे ही मुस्लिम सेना ने घेरा डाल दिया। रानी जिया शिव भक्त और सती महिला थी।उसने अपने ईष्ट का स्मरण किया और गौला नदी के पत्थरों में ही समा गई। मुस्लिम सेना ने उन्हें बहुत ढूँढ़ा परन्तु वे कहीं नहीं मिली। कहते हैं, उन्होंने अपने आपको अपने घाघरे में छिपा लिया था। वे उस घाघरे के आकार में ही शिला बन गई थीं।

No.-3. गौला नदी के किनारे आज भी एक ऐसी शिला है, जिसका आकार कुमाऊँनी घाघरे के समान हैं। उस शिला पर रंग-विरंगे पत्थर ऐसे लगते हैं – मानो किसी ने रंगीन घाघरा बिछा दिया हो। वह रंगीन शिला जिया रानी के स्मृति चिन्ह माना जाता है। रानी जिया को यह स्थान बहुत प्यारा था।

No.-4. यहीं उसने अपना बाग लगाया था और यहीं उसने अपने जीवन की आखिरी सांस भी ली थी। वह सदा के लिए चली गई परन्तु उसने अपने सतीत्व की रक्षा की। तब से उस रानी की याद में यह स्थान रानीबाग के नाम से विख्यात है।

No.-1. Download 15000 One Liner Question Answers PDF

No.-2. Free Download 25000 MCQ Question Answers PDF

No.-3. Complete Static GK with Video MCQ Quiz PDF Download

No.-4. Download 1800+ Exam Wise Mock Test PDF

No.-5. Exam Wise Complete PDF Notes According Syllabus

No.-6. Last One Year Current Affairs PDF Download

No.-7. Join Our Whatsapp Group

No.-8. Join Our Telegram Group

Leave a Comment

Your email address will not be published.

Scroll to Top