Indian Constitutional Amendments Full List

नमस्कार दोस्तों SSC NOTES PDF वेबसाइट में आपका स्वागत है। इस आर्टिकल में भारतीय संविधान संशोधन (Indian Constitutional Amendments) की पूरी लिस्ट दी गयी है।  यह आर्टिकल उन उम्मीदवारों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, जो आईएएस, पीसीएस, एसएससी, रेलवे, लेखपाल, BDO, विद्युत विभाग जेई इत्यादि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे है। अधिकांश प्रतियोगी परीक्षाओं में संविधान संशोधन से संबंधित प्रश्न पूछें जाते है।

भारतीय संविधान संशोधन की पूरी लिस्ट | Indian Constitutional Amendments Full List

पहला संशोधन (1951)

No.-1.  इस संशोधन द्वारा नौवीं अनुसूची को शामिल किया गया

दूसरा संशोधन (1952)

No.-2.  संसद में राज्यों के प्रतिनिधित्व को निर्धारित किया गया

तीसरा संशोधन (1954)

No.-3.  इसके अंतर्गत सातवीं अनुसूची में समवर्ती सूची की 33वीं प्रविष्टि के स्थान पर खाद्यान्न, पशुओं के लिए चारा, कच्चा कपास, जूट आदि को रखा गया जिसके उत्पादन एवं आपूर्ति को लोकहित में समझने पर सरकार उस पर नियंत्रण लगा सकती है।

चौथा संशोधन (1955)

No.-4.  इसके अंतर्गत व्यक्तिगत संपत्ति को लोकहित में राज्य द्वारा हस्तगत किए जाने की स्थिति में, न्यायालय इसकी क्षतिपूर्ति के संबंध में परीक्षा नहीं कर सकती है।

7वाँ संशोधन (1956)

No.-5.  इस संशोधन द्वारा भाषायी आधार पर राज्यों का पुनर्गठन हुआ

9वाँ संशोधन (1960)

No.-6.  इसके द्वारा संविधान की प्रथम अनुसूची में परिवर्तन करके भारत और पाकिस्तान के बीच 1958 की संधि की शर्तों के अनुसार बेखबारी, खुलना आदि क्षेत्र पाकिस्तान को दे दिए गए

10वाँ संशोधन (1961)

No.-7.   दादरा और नगर हवेली को भारतीय संघ में शामिल कर उन्हें संघीय क्षेत्र की स्थिति प्रदान की गई

12वाँ संशोधन (1962)

No.-8.   इसके अंतर्गत गोवा, दमन और दीव का भारतीय संघ में एकीकरण किया गया

13वाँ संशोधन (1962)

No.-9.   इसके अंतर्गत नागालैंड के संबंध में विशेष प्रावधान अपनाकर उसे एक राज्य का दर्जा दे दिया गया। दिसंबर, 1963 को नागालैंड पूर्ण राज्य बन गया

14वाँ संशोधन (1963)

No.-10.   पांडिचेरी को संघ राज्य क्षेत्र के रूप में प्रथम अनुसूची में जोड़ा गया तथा हिमाचल प्रदेश, गोवा, दमन और दीव, पांडिचेरी और मणिपुर में विधान सभाओं की स्थापना की व्यवस्था की गई

15वाँ संशोधन (1963)

No.-11.   इसके अंतर्गत उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की सेवामुक्ति की आयु 50 से बढ़ाकर 62 वर्ष कर दी गई तथा अवकाश प्राप्त न्यायाधीशों की उच्च न्यायालय में नियुक्ति से संबंधित प्रावधान बनाए गए

18वां संशोधन (1966)

No.-12.  इसके अंतर्गत पंजाब का भाषायी आधार पर पुनर्गठन हुआ

19वाँ संशोधन (1966)

No.-13.  इसके अंतर्गत चुनाव आयोग के अधिकारों में परिवर्तन किया गया एवं उच्च न्यायालयों को चुनाव याचिकाएँ सुनने का अधिकार दिया गया

21वाँ संशोधन (1967)

No.-14.  आठवीं अनुसूची में ‘सिंधी भाषा को जोड़ा गया

22वां संशोधन (1968)

No.-15. मेघालय को एक स्वतंत्र राज्य के रूप में स्थापित करने तथा उसके लिए विधान मंडल और मंत्रिपरिषद का उपबंध  करने की शक्ति संसद को प्रदान की गई

23वाँ संशोधन (1969)

No.-16.  इसके अंतर्गत विधान पालिकाओं में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के आरक्षण एवं आंग्ल भारतीय समुदाय के लोगों का मनोनयन दस वर्षों के लिए और बढ़ा दिया गया

24वाँ संशोधन (1971)

No.-17.  संसद को मौलिक अधिकारों सहित संविधान के किसी भी भाग में संशोधन का अधिकार दिया गया

26वाँ संशोधन (1971)

No.-18.  इसके अंतर्गत भूतपूर्व देशी राज्यों के शासकों की विशेष उपाधियाँ एवं उनके प्रिवीपर्स को समाप्त कर दिया गया

27वाँ संशोधन (1971)

No.-19.   इसके अंतर्गत मिजोरम एवं अरुणाचल प्रदेश को केंद्र शासित प्रदेश के रूप में स्थापित किया गया

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29वाँ संशोधन (1972)

No.-20. इसके अंतर्गत केरल भू-सुधार (संशोधन) अधिनियम 1969 तथा केरल भू-सुधार (संशोधन) अधिनियम, 1971 को संविधान की नौवीं अनुसूची में रख दिया गया जिससे इसकी संवैधानिक वैधता को न्यायालय में चुनौती न दी जा सके

31वाँ संशोधन (1973)

No.-21.  लोकसभा की अधिकतम् सदस्य संख्या 547 कर दी गई। इनमें से 545 निर्वाचित व 2 राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत होंगे

35वाँ संशोधन (1974)

No.-22.  इसके अंतर्गत सिक्किम का संरक्षित राज्यों का दर्जा समाप्त कर उसे संबद्ध राज्य के रूप में संघ में शामिल किया गया

36वां संशोधन (1975)

No.-23.  सिक्किम को भारतीय संघ में 22वें राज्य के रूप में प्रवेश दिया गया

37वाँ संशोधन (1975)

No.-24.  अरुणाचल प्रदेश में व्यवस्थापिका तथा मंत्रिपरिषद की स्थापना की गई

39वाँ संशोधन (1975)

No.-25.  इसमें राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री एवं लोक सभा अध्यक्ष के निर्वाचन संबंधी विवादों को न्यायिक परीक्षण से मुक्त कर दिया गया

41वाँ संशोधन (1976)

No.-26. इसमें राज्य लोक सेवा आयोग के सदस्यों की सेवा मुक्ति की आयु सीमा 60 वर्ष से बढ़ाकर 62 वर्ष कर दी गई, पर संघ लोक सेवा आयोग के सदस्यों की सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष रहने दी गई

42वाँ संशोधन (1976)

No.-1.  इसे लघु संविधान की संज्ञा प्रदान की गई है।

No.-2.  संविधान की प्रस्तावना में धर्म निरपेक्ष’, ‘समाजवादी और अखंडता’ शब्द जोड़े गए नागरिकों के 10 मूल कर्तव्य निश्चित किए गए

No.-3.  लोकसभा व विधान सभाओं के कार्यकाल में एक वर्ष की वृद्धि की गई।

No.-4.  नीति-निदेशक तत्त्वों में कुछ नवीन तत्त्व जोड़े गए

No.-5.  इसके द्वारा शिक्षा, नाप-तौल, वन और जंगली जानवर तथा पक्षियों की रक्षा विषय राज्य सूची से निकालकर समवर्ती सूची में रखे गए

No.-6.  यह व्यवस्था की गई कि अनुच्छेद 352 के अंतर्गत आपातकाल संपूर्ण देश में लागू किया जा सकता है या किसी एक या कुछ भागों के लिए संसद द्वारा किए गए संविधान संशोधन को न्यायालय में चुनौती देने से वर्जित कर दिया गया

44वाँ संशोधन (1978)

No.-1.  संपत्ति के मूल अधिकार को समाप्त करके इसे विधिक अधिकार बना दिया गया

No.-2.  लोकसभा तथा राज्य विधान सभाओं का कार्यकाल पुनः5 वर्ष कर दिया गया

No.-3.  राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और लोकसभा अध्यक्ष के चुनाव विवादों की सुनवाई का अधिकार पुनः सर्वोच्च तथा उच्च न्यायालय को ही दे दिया गया

No.-4.  मंत्रिमंडल द्वारा राष्ट्रपति को जो भी परामर्श दिया जाएगा, राष्ट्रपति मंत्रिमंडल को उस पर दोबारा विचार करने के लिए कह सकेगा लेकिन पुनर्विचार के बाद मंत्रिमंडल राष्ट्रपति को जो भी परामर्श देगा राष्ट्रपति उस परामर्श को अनिवार्यतः स्वीकार करेगा

No.-5.  व्यक्ति के जीवन और स्वतंत्रता के अधिकार को शासन के द्वारा आपातकाल में भी स्थगित नहीं किया जा सकता

50वाँ संशोधन (1984)

No.-1.   इसके द्वारा अनुच्छेद 33 में संशोधन कर सैन्य सेवाओं की पूरक सेवाओं में कार्य करने वालों के लिए आवश्यक सूचनाएँ एकत्रित करने, देश की संपत्ति की रक्षा करने और कानून तथा व्यवस्था से संबंधित दायित्व भी दिए गए, साथ ही इन सेवाओं द्वारा उचित कर्तव्य पालन हेतु संसब को कानून बनाने के अधिकार भी दिए गए

52वाँ संशोधन (1985)

No.-1.  इस संशोधन द्वारा संविधान में 10वीं अनुसूची जोड़ी गई. इसके द्वारा राजनीतिक दल-बदल पर कानूनी रोक लगाने की चेष्टा की गई है।

53वाँ संशोधन (1986)

No.-1.  इसके द्वारा अनुच्छेद 371 में खंड जी’ जोड़कर मिजोरम को राज्य का दर्जा दिया गया

54वाँ संशोधन (1986)

No.-1.  इसके द्वारा संविधान की दूसरी अनुसूची के भाग ‘डी’ में संशोधन कर न्यायाधीशों के वेतन में वृद्धि का अधिकार संसद को दिया गया

55वाँ संशोधन (1986)

No.-1.  इसके अनुसार अरुणाचल प्रदेश को राज्य बनाया गया

56वां संशोधन (1987)

No.-1.  इसके अंतर्गत गोवा को एक राज्य का दर्जा दिया गया तथा दमन और दीव को केंद्र शासित प्रदेश के रूप में ही रहने दिया गया

57वाँ संशोधन (1987)

No.-1.  इसके अंतर्गत अनुसूचित जनजातियों के आरक्षण के संबंध में मेघालय, मिजोरम, नागालैंड एवं अरुणाचल प्रदेश की विधान सभा सीटों का परिसीमन इस शताब्दी के अंत तक कर दिया गया

58वाँ संशोधन (1987)

No.-1.  इसके द्वारा राष्ट्रपति को संविधान का प्रामाणिक हिन्दी संस्करण प्रकाशित करने के लिए अधिकृत किया गया

60वां संशोधन (1988)

No.-1.  इसके अंतर्गत व्यवसाय कर की सीमा 250 रुपए से बढ़ाकर 2500 रुपए प्रति व्यक्ति प्रतिवर्ष कर दी गई

61वाँ संशोधन (1989)

No.-1.   मताधिकार के लिए न्यूनतम् आवश्यक आयु 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष कर दी गई

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65वाँ संशोधन (1990)

No.-1. अनुच्छेद-338 में संशोधन करके अनुसूचित जाति तथा जनजाति आयोग के गठन की व्यवस्था की गई

69वाँ संशोधन (1991)

No.-1.  दिल्ली का नाम राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली किया गया तथा इसके लिए 70 सदस्यीय विधान सभा तथा 7 सदस्यीय मंत्रिमंडल गठन का उपबंध किया गया

70वाँ संशोधन (1992)

No.-1.  दिल्ली तथा पांडिचेरी की विधान सभाओं के सदस्यों को राष्ट्रपति के निर्वाचक मंडल में शामिल करने का प्रावधान किया गया

71वाँ संशोधन (1992)

No.-1.  तीन अन्य भाषाओं कोंकणी, मणिपुरी और नेपाली को संविधान की आठवीं अनुसूची में जोड़ा गया

73वाँ संशोधन (1992)

No.-1.  संविधान में एक नया भाग 9 तथा एक नई अनुसूची 11वी अनुसूची को जोड़ा गया, पंचायती राज व्यवस्था को संवैधानिक दर्जा प्रदान किया गया

74वाँ संशोधन (1993)

No.-1.  संविधान में एक नया भाग 9 (क) और एक नई अनुसूची 12वीं अनुसूची को जोड़ा गया तथा शहरी क्षेत्र की स्थानीय स्वशासन संस्थाओं को संवैधानिक दर्जा प्रवान किया गया

76वाँ संशोधन (1994)

No.-1. इस संशोधन अधिनियम द्वारा संविधान की 9वीं अनुसूची में संशोधन किया गया तथा तमिलनाडु सरकार द्वारा पारित पिछड़े वर्ग के लिए सरकारी नौकरियों में 69% आरक्षण का उपबंध करने वाले अधिनियम को 9वीं अनुसूची में शामिल कर दिया गया

78वाँ संशोधन (1995)

No.-1.  9वीं अनुसूची में विभिन्न राज्यों द्वारा पारित 27 भूमि सुधार विधियों को शामिल किया गया जिससे 9वीं अनुसूची में कुल 284 अधिनियम हो गए

82वाँ संशोधन (2000)

No.-1.   राज्यों को सरकारी नौकरियों में आरक्षित रिक्त स्थानों की भर्ती हेतु प्रोन्नति के मामलों में अनुसूचित जातियों एवं अनुसूचित जनजातियों के अभ्यर्थियों के लिए न्यूनतम् प्राप्तांकों में छूट प्रदान करने की अनुमति प्रदान की गई

84वाँ संशोधन (2001)

No.-1.  लोकसभा तथा विधान सभाओं की सीटों की संख्या में वर्ष 2026 तक कोई परिवर्तन न करने का प्रावधान किया गया

85वाँ संशोधन (2001)

No.-1.   सरकारी सेवाओं में अनुसूची जाति/जनजाति के अभ्यर्थियों के लिए पदोन्नतियों में आरक्षण की व्यवस्था

86वाँ संशोधन (2002)

No.-1.   इस संशोधन अधिनियम द्वारा देश के 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों के लिए अनिवार्य एवं निशुल्क शिक्षा को मौलिक अधिकार के रूप में मान्यता देने संबंधी प्रावधान कर इसे अनुच्छेद 21 (क) के अंतर्गत संविधान में जोड़ा गया है।

88वाँ संशोधन (2003)

No.-1.   सेवा पर कर का प्रावधान किया गया

89वाँ संशोधन (2003)

No.-1.  अनुसूचित जनजाति के लिए पृथक् राष्ट्रीय आयोग की स्थापना की व्यवस्था की गई

91वाँ संशोधन (2003)

No.-1. इसमें दल-बदल विरोधी कानून में संशोधन किया गया

92वाँ संशोधन (2003)

No.-1.  इसमें संविधान की आठवीं अनुसूची में चार और भाषाओं मैथिली, डोगरी, बोडो और संथाली को जोड़ा गया

93वाँ संशोधन (2005)

No.-1. इसमें एस सी/एस टी एवं ओ बी सी बच्चों के लिए सभी सरकारी व निजी स्कूलों में सीटें आरक्षित रखने का प्रावधान किया गया

94वाँ संशोधन (2006)

No.-1.  इस संशोधन द्वारा बिहार राज्य को एक जनजाति कल्याण मंत्री नियुक्त करने के उत्तरदायित्व से मुक्त किया गया तथा यह व्यवस्था झारखंड और छत्तीसगढ़ राज्यों में लागू की गई।

95वाँ संशोधन (2010)

No.-1.  एससी/एसटी के लिए लोकसभा व विधानसभाओं में आरक्षण को 60 से 70 साल तक के लिए बढ़ाया गया

96वाँ संशोधन (2011)

No.-1.   इसमें उड़ीसा का नाम बदलकर ओड़िशा करने व उड़िया भाषा का नाम ओड़िया करने का प्रावधान किया गया

97वाँ संशोधन (2011)

No.-1.  इसके द्वारा संविधान के भाग 9 में भाग १ ख जोड़ा गया और हर नागरिक को को-ऑपरेटिव सोसाइटी के गठन  का अधिकार दिया गया

98वाँ संशोधन (2012)

No.-1.  कर्नाटक के राज्यपाल को हैदराबाद-कर्नाटक क्षेत्र के लिए एक अलग विकास बोर्ड गठित करने का अधिकार दिया गया।

99वाँ संशोधन (2014)

No.-1.  राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (NJAC) का गठन किया गया जिसे बाद में सर्वोच्च न्यायालय ने असंवैधानिक घोषित कर दिया

100वाँ संशोधन (2015)

No.-1.   बांग्लादेश के साथ भूमि-सीमा समझौता (LBA) लागू किया गया

101वाँ संशोधन (2016)

No.-1.   पूरे देश में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू किया गया

उम्मीद है ‘संविधान संशोधन लिस्ट’ लेख आपको पसंद आया होगा। इस आर्टिकल में भारत की संविधान संशोधन संबंधित जानकारी, Constitutional Amendments Full List in Hindi, दिया गया है। यह लेख कैसा लगा कमेंट में ज़रूर बताएं और अपने दोस्तों से शेयर करना ना भूलें। धन्यवाद!

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