Generation of Computer in Hindi

कम्प्यूटर की पीढ़ियों का इतिहास | Generation of Computer in Hindi

No:1. कम्प्यूटर की पीढ़ियां (Generation of Computer | Computer Generation in Hindi) – हम जानते है की कम्प्यूटर का विकास (computer history) 16वीं शताब्दी के आरंभ में हुआ था और इसके फलस्वरूप वह जिस रूप में पहुंचा है, आज हमारे सामने है। परन्तु आज के कम्प्यूटर में भी पिछले पचास सालों के दौरान तेजी से परिवर्तन हुआ है।
No:2. कम्प्यूटर की पीढ़ियां (Generation of Computer), कंप्यूटर की कार्य क्षमता के आधार पर विकसित होती जा रही है, जो इस प्रकार है|

कम्प्यूटर की पीढ़ियां | Computer Generation History

No:1. कम्प्यूटर के विकास की अवधि को हम पांच अलग-अलग अवस्थाओं (timeline) में विभाजित कर सकते है। जिन्हें कम्प्यूटर की पीढ़ियां (Generation of Computer) के रूप में जाना जाता है।
No:2. कम्प्यूटरों में प्रयोग किये गये स्विच के परिपथ (सर्किट) के प्रत्येक अवस्था के कम्प्यूटर को एक दूसरे से अलग किया जा सकता है।

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No:3. कम्प्यूटर के विकास की अवधि (History of Computers) को पांच अलग-अलग अवस्थाओं (timeline) में विभाजित किया जाता है-

Timelines (कार्यकाल)Generations (पीढ़ी)Component (घटक)
1940 – 1956पहली पीढ़ीवैक्यूम ट्यूब (Vacuum tube)
1956 – 1963दूसरी पीढ़ीट्रांजिस्टर (Transistor)
1964 – 1971तीसरी पीढ़ीइंटीग्रेटेड सर्किट (IC Chip)
1972 – 1989चौथी पीढ़ीमाइक्रोप्रोसेसर (Microprocessor)
1989 – अब तकपांचवी पीढ़ीकृत्रिम बुद्धि (Artificial Intelligence)

 

पहली पीढ़ी के कम्प्यूटर | First Generation of Computer

No:1. कम्प्यूटर की प्रथम पीढ़ी की शुरूआत 1940 से 1945 से मानी जाती है। पहली पीढ़ी के कम्प्यूटरों में Vacuum Tube or Thermionic Valve (थर्मीऑन वाल्व) प्रयुक्त किये जाते थे। ये कम्प्यूटर बहुत बड़े आकार के होते थे और उन पर प्रोग्राम लिखना कठिन होता था।
No:2. प्रथम पीढ़ी के कुछ विशेष कम्प्यूटर का नाम (ENIAC, EDVAC, EDSAC, UNIVAC) निम्न है:-

एनिएक (ENIAC)

No:1. एनिएक क्या है ? (ENIAC in Hindi) – यह पहला इलेक्ट्राॅनिक कम्प्यूटर (electronic computer) था, जिसे जाॅन एकर्ट और जाॅन माचले (J. Presper Eckert and John Mauchly) ने 15 फरवरी 1946 में University of Pennsylvania, USA में बनाया था। इसे Electronic Numerical Integrator and Computer (ENIAC) नाम दिया गया था।
No:2. एनिएक (Eniac) का आकार (size) 30 x 50 फीट, भार (weight) 30 टन था और इनमें 18,000 निर्वात टूयूबें, 70,000 ट्राॅजिस्टर, 10,000 कैपेसिटर थे तथा इसे 15,0000 वाॅट बिजली की आवश्यकता होती थी। आज के कम्प्यूटर एनिएक से कई गुणा शक्तिशाली होते हुए भी आकार में बहुत छोटा है।

एडवैक (EDVAC)

No:1. एडवैक क्या है? (EDVAC in Hindi) – इसका पूरा नाम Electronic Discrete Variable Automatic Computer (EDVAC) है। इसका विकास 1950 में हुआ था। इसमें कम्प्यूटर के अंदर आंकड़े (data) और अनुदेशों (instructions) को सुरक्षित रखना शुरू किया गया था।
No:2. इससे कम्प्यूटर के काम की गति (computer speed) तेज हुई क्योंकि कम्प्यूटर तक आंकड़े (data) और अनुदेश (Instructions) जल्दी पहुंचते थे।
No:3. अनुदेशों (Instructions) को सुरक्षित रखने का एक और लाभ यह भी था कि कम्प्यूटर द्वारा स्वयं तर्कसंगत (self rational decision) निर्णय लिया जा सकता था।

एडसैक (EDSAC)

एडसैक क्या है? (EDSAC in Hindi) – एडसैक (EDSAC) का पूरा नाम Electronic Delay Storage Automatic Calculator है। EDSAC को 1949 में एम.वी.विल्के (Maurice Wilkes) ने कैंब्रिज विश्वविद्यालय में विकसित किया था।

यूनिवैक-1 (UNIVAC 1)

यूनिवैक क्या है? (UNIVAC in Hindi) – यूनिवैक I (UNIVAC I) यूनिवर्सल अकांउटिंग कम्प्यूटर संगठन द्वारा J. Eckert और John Mauchly ने 1951 में तैयार किया था। इसका पूरा नाम Universal Automatic Computer (UNIVAC) है। यह व्यावसायिक अनुप्रयोग (business purpose) के लिए पहला Electronic Digital Computer Design था।

प्रथम पीढ़ी कम्प्यूटरों के गुण –

No:1. वेक्यूम ट्यूब (vacuum tube) उस समय उपलब्ध अकेले इलेक्ट्राॅनिक कंपोनेंट थे।
No:2. इलेक्ट्राॅनिक डिजिटल कम्प्यूटर का अविष्कार ट्यूब ने ही संभव बनाया।
No:3. इस समय तीव्र गति से गणना करने वाले अकेले यंत्र थे, जो मिलीसेकण्ड (ms) में गणना कर सकते थे।

सीमाएं –

No:1. आकार में बहुत बड़े थे।
No:2. विश्वसनीय नहीं थे।
No:3. हजारों वेक्यूम ट्यूब नियमित रूप से बड़ी मात्रा में गर्मी पैदा करती थी।
No:4. वातानुकुलन की आवश्यकता पड़ती थी।
No:5. हार्डवेयर में टूट-फूट खराबी आदि की संभावना अधिक थी।
No:6. नियमित देखभाल की आवश्यकता थी।
No:7. अवहनीय थे।
No:8. कार्य करने योग्य बनाने के लिए कम्प्यूटर के प्रभाग स्वयं जोड़ने पड़ते थे।
No:9. महंगे थे व्यवसायिक उत्पादन कम होता था।

दूसरी पीढ़ी के कम्प्यूटर | Second Generation of Computer

No:1. कम्प्यूटर की दूसरी पीढ़ी की शुरूआत 1956 से 1963 से मानी जाती है। 1955 के आसपास ट्रांजिस्टर (Transistor) नाम के यंत्र ने पहली पीढ़ी के कम्प्यूटरों की विद्युत ट्यूबों (electric vacuum tube) का स्थान ले लिया।
No:2. विद्युत ट्यूबों (Electric tube) की अपेक्षा ट्रांजिस्टर (Transistor) बहुत छोटे होते हैं और उनकी काम करने की गति अधिक होती है।
No:3. इनमें कोई फिलामेंट नहीं होता है और उन्हें उष्मा की आवश्यकता भी नहीं होती है। इनकी निर्माण लागत भी बहुत कम थी। इस प्रकार कम्प्यूटर के आकार में भी काफी कमी आयी।
No:4. दूसरी पीढ़ी के कम्प्यूटरों (Second Generation of Computer) में Central Processing Unit (CPU), स्मृति (Memory), प्रोग्राम की भाषा (Programming Language) और इनपुट एवं आउटपुट यूनिटों (I/O units) की अवधारणा विकसित की गई थी।
No:5. प्रोग्राम की भाषा (Programme Language), जैसे- COBOL, FORTRAN इस अवधि के दौरान विकसित की गई थी।

Second Generation of Computer Examples

दूसरी पीढ़ी के कुछ कम्प्यूटर (Second Generation of Computer Examples) उदाहरण निम्न है –

आईबीएम 1620

IBM 1620, पहली पीढ़ी के कम्प्यूटरों की तुलना में इसका आकार छोटा था और इसे अधिकांशतः वैज्ञानिक कार्यो (Scientific work) के लिए काम में लिया जाता था।

आईबीएम 1401

IBM 1401, इसका आकार अपेक्षाकृत छोटे से मध्यम था और व्यवसायिक कामों के लिए इस्तेमाल होता था।

सीडीसी 3600

CDC 3600, इसका आकार बड़ा था और वैज्ञानिक कार्यो के लिए प्रयोग में लाया जाता था।
साथ ही अन्य IBM 1620, IBM 7094, CDC 1604, CDC 3600 एवं UNIVAC 1108 इत्यादि इसके उदाहरण है।

लाभ –

No:1. पहली पीढ़ी के कम्प्यूटर से आकार में छोटे थे।
No:2. अधिक विश्वसनीय।
No:3. कम गर्मी पैदा करते थे।
No:4. गणना समय और कम, मिलिसेकण्ड (ms) से माइक्रोसेकण्ड (μs) हो गया, अतः तीव्र गणना करने लगे।
No:5. हार्डवेयर टूट-फूट कुद कम हुई।
No:6. व्यवसायिक उत्पादन होने लगा।

सीमाएं –

No:1. वातानुकूलन आवश्यक था।
No:2. नियमित देखरेख भी आवश्यक था।
No:3. इनके कलपुर्जो को स्वयं जोड़ना होता था।
No:4. व्यावसायिक उत्पादन अब भी महंगा व जटिल था।

तीसरी पीढ़ी के कम्प्यूटर | Third Generation of Computer

No:1. कम्प्यूटर की तीसरी पीढ़ी की शुरूआत 1964 से 1971 से मानी जाती है। इलेक्ट्राॅनिक तकनीक में सुधार होते रहे।
No: 2. ‘Micro Electronics‘ तकनीक के अविष्कार ने बड़ी संख्या में circuit element को बहुत छोटी silicon chips में समाहित करने में सफलता अर्जित की। यह तकनीक ‘एकीकृत परिपथ (Integrated Circuit)‘ कहलाई। Generation of Computer in Hindi
No:3. इन Integrated Circuit (IC) की मदद से निर्मित कम्प्यूटर तीसरी पीढ़ी की प्रतिनिधित्व/शुरुआत करते हैं।
No:4. तीसरी पीढ़ी के कुछ कम्प्यूटर (Third Generation of Computer Examples) उदाहरण निम्न हैं –
IBM-360, Honeywell-6000, PDP (Personal Data Processor) और IBM-370/168

लाभ –

No:1. अन्य पिछले कम्प्यूटरों से आकार में छोटे थे।
No:2. दूसरी पीढ़ी के कम्प्यूटरों से अधिक विश्वसनीय थे।
No:3. कम गर्मी व उष्मा छोड़ते थे।
No:4. इन्होंने गणना समय और कम लिया जो माइको सेकण्ड (μs) से नेनो सेकण्ड (ns) हो गया।
No:5. देखरेख पर व्यय हार्डवेयर टूट-फूट कम होने से कम हो गया।
No:6. आसानी से वहनीय थे।
No:7. बड़ी संख्या में व्यवसायिक उत्पादन किया गया।
No:8. ऊर्जा की आवश्यकता इन्हें कम पड़ती थी।
No:9. अब सभी कलपुर्जे स्वयं जोड़ने की आवश्यकता नहीं रही। श्रम व समय की बचत संभव हुई।

सीमाएं –

No:1. आईसी चिप्स (IC) को बनाए रखना (maintenance) मुश्किल होता है।
No:2. आईसी चिप्स के निर्माण के लिए अति जटिल तकनीक (high sophisticated technology) की आवश्यक होती है
No:3. वातानुकूल बनाये रखने हेतु एयर कंडीशनिंग की आवश्यकता है।

चौथी पीढ़ी के कम्प्यूटर | Fourth Generation of Computer

No:1. कम्प्यूटर की चौथी पीढ़ी की शुरूआत 1972 से 2010 से मानी जाती है। प्रारंभ में ICs में मात्र 10 से 20 की संख्या में ही सर्किट समाहित किए गए थे, जो Small Scale Integration (SSI) तकनीक कहलाती है। Generation of Computer in Hindi
No:2. आगे चलकर उन्नत तकनीक के विकास से यह संख्या 100 तक पहुंच गई। जो ‘Medium Scale Integration (MSI)‘ के नाम से प्रचलित हुई।
No:3. उसके पश्चात ‘Large scale integration (LSI)‘ का समय आया। जिसमें 30,000 से भी अधिक सर्किट एक छोटी ‘Chip‘ में समाहित करना संभव बनाया।
No:4. इसके पश्चात ‘Very large scale integration (VLSI)‘ तकनीक के विकसित होने में एक मिलियन से भी अधिक सर्किट एक चिप पर समाहित किए जा सकते है।
No:5. भविष्य में कम्प्यूटर की तकनीक में ओर भी विकास होगा। इसी LSI -Large Scale Integration तकनीक ने छोटे किन्तु अधिक क्षमता वाले कम्प्यूटर का विकास (future computer development) को संभव बनाया। Generation of Computer in Hindi
No:6. Fourth Generation of Computer Examples
चौथी पीढ़ी के कुछ कम्प्यूटर (Fourth Generation of Computer Examples) उदाहरण निम्नलिखित हैं –
IBM 4341, DEC 10, STAR 1000 एवं PUP 11 इत्यादि।

लाभ –

No:1. आकार में बहुत छोटे हो गए क्योंकि कंपोनेंट को पास-पास जोड़ना संभव हो गया।
No:2. अत्यधिक विश्वसनीय है।
No:3. उष्मा बहुत कम उत्सर्जित करते है।
No:4. बहुत सी स्थितियों में वातानुकूलन आवश्यक नहीं है।
No:5. पिछली पीढ़ियों से अधिक तेजी से गणना करते है।
No:6. इसकी गणना की गति अर्थात गणना समय नैनो सेकण्ड (ns) से पीको सेकण्ड (ps) में होती थी।
No:7. हार्डवेयर में टूटफूट अत्यंत कम हो जाने से रखरखाव व्यय में कमी आयी।
No:8. छोटे आकार के कारण वहनीयता का गुण रखते है।
No:9. सामान्यतः दैनिक कार्यो में भी प्रयुक्त होते है।
No:10. इन्हें स्वयं जोड़कर तैयार करना पड़ता साथ ही जोड़ने आदि का खर्च अत्यंत कम है।
No:11. सभी पिछली पीढ़ियों के कम्प्यूटरों में सबसे सस्ते है।

सीमाएं –

No:1. LIC चिप्स के निर्माण में बहुत अधिक आधुनिक व उन्नत तकनीक की आवश्यकता होती है।

पांचवी पीढ़ी के कम्प्यूटर | Fifth Generation of Computer

No:1. 1990 शताब्दी के कम्प्यूटरों को पांचवी पीढ़ी का कम्प्यूटर (fifth generation of computer) कहा जाता है। पांचवी पीढ़ी के कम्प्यूटर की गति अत्यधिक तीव्र है। इसके अलावा, यह साथ-साथ प्रासेसिंग कर सकता है। Generation of Computer in Hindi
No:2. इनमें कृत्रिम बुद्धि (Artificial Intelligence Generation) की अवधारणा आरंभ की गई है। ताकि कम्प्यूटर अपना निर्णय स्वयं ले सके। यह अभी भी विकास की अवस्था में है।
No:3. Fifth Generation of Computer Examples
पांचवी पीढ़ी के कुछ कम्प्यूटर (Fifth Generation of Computer Examples) उदाहरण निम्नलिखित हैं –
Desktop, Laptop, NoteBook, UltraBook एवं Chromebook इत्यादि।

लाभ –

No:1. यह विभिन्न आकारों और अनूठी विशेषताओं में उपलब्ध है।
No:2. ये अधिक विश्वसनीय है और तेजी से काम करता है।
No:3. यह Multimedia features द्वारा उपयोगकर्ता के सरल इंटरफेस (user friendly) के साथ कंप्यूटर संचलित होता है।

सीमाएं –

No:1. यह बहुत निम्न-स्तरीय भाषा (low level language) का उपयोग करता है।
No:2. मानव मस्तिष्क को सुस्त और कमजोर कर सकते हैं।
MUST READ : कम्प्यूटर का इतिहास और विकास | History of Computer in Hindi

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